अनजान क़हर

कुछ इस तरह आया है ये अनजान कहर की पंछी बोले अब उड़ सकेंगे हम भी हर पहर। इंसानो के कुचक्र को भेदा है किसी अनजाने रूह ने, तिलमिला उठे है अब सारे इंसान। पिंजरों की जागीर समझा करते थे वो हमें और आज उसी पिंजरों में क़ैद देख खुशी है मुझे। हर किसी को... Continue Reading →

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